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Monday, July 18, 2011

असली नकली - जोली अंकल का रोचक लेख

’’ असली नकली ’’

जैसे ही हवाई जहाज ने दिल्ली के एयरपोर्ट की धरती को छुआ तो नटवर लाल ने चैन की सांस लेते हुए कहा कि भगवान तेरा लाख-लाख षुक्र है। अभी नटवर लाल की यह दुआ पूरी भी नही हुई थी कि पुलिस वालों ने उसे चारों और से घेर लिया। पुलिस अफसरों ने जैसे ही उसका सामान चैक किया गया उसमें से लाखों रूप्ये के नकली नोट बरामद हो गये। अगले ही पल उसे सरकारी मेहमान बना कर पुलिस की गाड़ी से जज साहब के सामने पेष कर दिया गया। नटवर लाल को गौर से देखते हुए जज साहब ने पूछा कि तुमने यह नकली नोट क्यूं बनाए? नटवर लाल ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते हुए कहा जज साहब मैने तो इस बार सारे नोट बिल्कुल असली बनाने की पूरी कोषिष की थी, लेकिन न जानें पुलिस वालों को यह किस कमी के कारण नकली लग रहे है। इसी दौरान जज साहब ने अपनी याददाष्त पर थोड़ा जोर डाला तो उन्हें याद आया कि नटवर लाल तो पहले भी नकली नोट बनाने के जुर्म में सजा काट चुका है। इससे पहले कि जज साहब कुछ और कहते नटवर लाल ने कहा जी हजूर उस समय तो मेरे से ही नकली नोट बनाने में गलती हो गई थी। मैने अपनी बीवी की जिद्द को मानते हुए बापू की फोटो लगाने की बजाए अपने बेटे की फोटो लगा दी थी। इससे पहले कि जज साहब नटवर लाल को सजा सुना कर जेल भेजने का आदेष देते, नटवर लाल ने सीने में बहुत जोर से दर्द होने की नौंटकी षुरू कर दी। जज साहब को भी मजबूरन पुलिस वालों को कह कर इसे फौरन अस्पताल में भर्ती करने का आदेष सुनाना पड़ा।

अस्पताल के बिस्तर पर नटवर लाल को लिटाते हुए डॉक्टर साहब ने उससे पूछा कि कहां-कहां दर्द हो रहा है? अब असल में कोई तकलीफ तो थी ही नही तो नटवर लाल डाक्टर साहब को क्या बताता कि दर्द कहां हो रहा है? बात को और अधिक उलझाने के मकसद से नटवर लाल ने कहा कि डॉक्टर साहब एक जगह दर्द हो तो आपको बताऊ। इसी के साथ नटवर लाल ने चंद नोट डॉक्टर साहब की हथेली पर रखते हुए कहा कि आप कुछ देर के लिये पुलिस वालों के सामने अंधे बन जाओ, बाकी सब मैं खुद ही संभाल लूंगा। डॉक्टर साहब ने नटवर लाल को कुछ भी उल्टा सीधा कहने की बजाए इतनी राय जरूर दे डाली कि यदि वास्तव में कोई तकलीफ हो रही है तो किसी अच्छे से प्राईवेट अस्पताल में इलाज करवाना। हमारे यहां तो दवाईयों से लेकर डॉक्टर तक तुम किसी पर भी भरोसा नही कर सकते कि कौन असली है और कौन नकली। तुम यहां रह कर कुछ भी करो बस इस बात का ध्यान रहे कि मेरी नौकरी पर उंगली नही उठनी चाहिए। डॉक्टर के चेहरे के हाव-भाव को देखते ही नटवर लाल समझ गया कि यह भी कुछ न कुछ गौरख धंधे की बदोलत ही डॉक्टर बना बैठा है, नही तो यह आदमी इतनी जल्दी चंद रूप्यों के लिए अपना ईमान नही बेचता।

अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे नटवर लाल ने सामने पड़ी अखबार उठाई तो उसमें कई चौकानें वाली खबरें छपी हुई थी। कुछ दगाबाजों ने तो नकली इन्कमटैक्स अफसर बन कर एक गहनों की दुकान को ही लूट लिया था। कुछ ढ़ोंगी कलाकारों के बारे में छपा था कि वो फिल्मों में नकली ढाड़ी मूछ लगा कर दुनियां को धोखा दे रहेे है। आजकल तो यहां तक भी देखने में आ रहा है कि कुछ लोग अपनी षक्ल और बालो को रंग-रूप बदल कर खुद को डुप्लीकेट हीरो हीरोईन की जगह असली की तरह ही पेष करने लगे है। नटवर लाल ने अस्पताल में आते जाते मरीजों को बड़ी ही हैरानगी से देखते हुए सोचा कि मैं तो सिर्फ नकली नोटो का कारोबार करता हॅू परंतु इस अस्पताल में तो कोई नकली टांग लगा कर घूम रहा है, कोई नकली आंख लगवाने आया हुआ है। नकली दांत लगवाने वालों की लाईन तो न जाने कहां तक जा रही थी। जैसे ही नटवर लाल के नकली नोटो के साथ पकड़े जाने की खबर मीडिया में आई तो जज साहब को उसे वहां भेजने का आदेष देना पड़ा जहां से नटवर लाल नकली नोट लेकर आया था।


कहचरी से निकलते हुए नटवर लाल ने हंसते हुए जज साहब से कहा कि बचपन से ही सुनते आये है कि घोड़ी चाहे लकड़ी की हो घोड़ी तो घोड़ी ही होती है। इसी तरह डिग्री असली हो या नकली डिग्री तो डिग्री ही होती है। हमारे मंत्री असली तो क्या नकली डिग्री के बिना ही देष की सरकार को बरसों से चला रहे है, उन्हें तो कोई कुछ नही कहता। हर कोई जानता है कि इन लोगो की बातो में सिर्फ दिखावा और प्यार में छलावा होता है। ऐसे लोग जब कभी आसूं भी बहाते है तो वो भी नकली खारे पानी के होते है। आप मुझे अकेले को सजा देकर क्या सुधार कर लोगे। इस दुनियां में असल बचा ही क्या है सब कुछ नकली ही रह गया है। जिस हवाई जहाज से नटवर लाल को भेजने का प्रबंन्ध किया गया उसके उड़ने से पहले ही यह मालूम हुआ कि इस जहाज का पायलट भी नकली है। पुलिस की अपराध षाखा ने बताया कि इस पायलट ने जाली दस्तावेज जमां करवा कर नकली पायलट का लाइसेंस हासिल किया था।

जौली अंकल का तो यही मानना है कि नकली वस्तुओं का व्यापार करने वाले चाहे किसी भी भेस में हो एक सभी एक ही थैली के चट्टे के बट्टे है। आज यदि हमें पूरी कीमत देकर भी हर चीज नकली मिल रही है तो उसका एक ही कारण हेै कि हम लोग खुलकर ऐसे दोशियों के खिलाफ आवाज नही उठाते। नकली वस्त्ुओ का कारोबार करने वालों के मन में मानवता के प्रति कोई दया नही होती इसलिये ऐसे लोगो को मानव कहना ही गलत है। हर नकली चीज को असली बना कर अमीर बनने वालो को यह नही भूलना चाहिये कि अमीर वो नही जिसके पास बहुत धन है या जिसने बहुत धन जमा किया हो। असली अमीर तो वो है जिसे और अधिक धन की जरूरत नही रहती। जिसे हर समय धन की भूख रहती हो वो तो सदा निर्धन ही कहलाता है। छल, कपट, बेईमानी और धोखा देकर चाहे कोई लाख कोषिष कर ले लेकिन असली सदा असली और नकली हमेषा नकली ही होता है।

’’ जौली अंकल ’’

असली नकली - जोली अंकल का रोचक लेख

’’ असली नकली ’’

जैसे ही हवाई जहाज ने दिल्ली के एयरपोर्ट की धरती को छुआ तो नटवर लाल ने चैन की सांस लेते हुए कहा कि भगवान तेरा लाख-लाख षुक्र है। अभी नटवर लाल की यह दुआ पूरी भी नही हुई थी कि पुलिस वालों ने उसे चारों और से घेर लिया। पुलिस अफसरों ने जैसे ही उसका सामान चैक किया गया उसमें से लाखों रूप्ये के नकली नोट बरामद हो गये। अगले ही पल उसे सरकारी मेहमान बना कर पुलिस की गाड़ी से जज साहब के सामने पेष कर दिया गया। नटवर लाल को गौर से देखते हुए जज साहब ने पूछा कि तुमने यह नकली नोट क्यूं बनाए? नटवर लाल ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते हुए कहा जज साहब मैने तो इस बार सारे नोट बिल्कुल असली बनाने की पूरी कोषिष की थी, लेकिन न जानें पुलिस वालों को यह किस कमी के कारण नकली लग रहे है। इसी दौरान जज साहब ने अपनी याददाष्त पर थोड़ा जोर डाला तो उन्हें याद आया कि नटवर लाल तो पहले भी नकली नोट बनाने के जुर्म में सजा काट चुका है। इससे पहले कि जज साहब कुछ और कहते नटवर लाल ने कहा जी हजूर उस समय तो मेरे से ही नकली नोट बनाने में गलती हो गई थी। मैने अपनी बीवी की जिद्द को मानते हुए बापू की फोटो लगाने की बजाए अपने बेटे की फोटो लगा दी थी। इससे पहले कि जज साहब नटवर लाल को सजा सुना कर जेल भेजने का आदेष देते, नटवर लाल ने सीने में बहुत जोर से दर्द होने की नौंटकी षुरू कर दी। जज साहब को भी मजबूरन पुलिस वालों को कह कर इसे फौरन अस्पताल में भर्ती करने का आदेष सुनाना पड़ा।

अस्पताल के बिस्तर पर नटवर लाल को लिटाते हुए डॉक्टर साहब ने उससे पूछा कि कहां-कहां दर्द हो रहा है? अब असल में कोई तकलीफ तो थी ही नही तो नटवर लाल डाक्टर साहब को क्या बताता कि दर्द कहां हो रहा है? बात को और अधिक उलझाने के मकसद से नटवर लाल ने कहा कि डॉक्टर साहब एक जगह दर्द हो तो आपको बताऊ। इसी के साथ नटवर लाल ने चंद नोट डॉक्टर साहब की हथेली पर रखते हुए कहा कि आप कुछ देर के लिये पुलिस वालों के सामने अंधे बन जाओ, बाकी सब मैं खुद ही संभाल लूंगा। डॉक्टर साहब ने नटवर लाल को कुछ भी उल्टा सीधा कहने की बजाए इतनी राय जरूर दे डाली कि यदि वास्तव में कोई तकलीफ हो रही है तो किसी अच्छे से प्राईवेट अस्पताल में इलाज करवाना। हमारे यहां तो दवाईयों से लेकर डॉक्टर तक तुम किसी पर भी भरोसा नही कर सकते कि कौन असली है और कौन नकली। तुम यहां रह कर कुछ भी करो बस इस बात का ध्यान रहे कि मेरी नौकरी पर उंगली नही उठनी चाहिए। डॉक्टर के चेहरे के हाव-भाव को देखते ही नटवर लाल समझ गया कि यह भी कुछ न कुछ गौरख धंधे की बदोलत ही डॉक्टर बना बैठा है, नही तो यह आदमी इतनी जल्दी चंद रूप्यों के लिए अपना ईमान नही बेचता।

अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे नटवर लाल ने सामने पड़ी अखबार उठाई तो उसमें कई चौकानें वाली खबरें छपी हुई थी। कुछ दगाबाजों ने तो नकली इन्कमटैक्स अफसर बन कर एक गहनों की दुकान को ही लूट लिया था। कुछ ढ़ोंगी कलाकारों के बारे में छपा था कि वो फिल्मों में नकली ढाड़ी मूछ लगा कर दुनियां को धोखा दे रहेे है। आजकल तो यहां तक भी देखने में आ रहा है कि कुछ लोग अपनी षक्ल और बालो को रंग-रूप बदल कर खुद को डुप्लीकेट हीरो हीरोईन की जगह असली की तरह ही पेष करने लगे है। नटवर लाल ने अस्पताल में आते जाते मरीजों को बड़ी ही हैरानगी से देखते हुए सोचा कि मैं तो सिर्फ नकली नोटो का कारोबार करता हॅू परंतु इस अस्पताल में तो कोई नकली टांग लगा कर घूम रहा है, कोई नकली आंख लगवाने आया हुआ है। नकली दांत लगवाने वालों की लाईन तो न जाने कहां तक जा रही थी। जैसे ही नटवर लाल के नकली नोटो के साथ पकड़े जाने की खबर मीडिया में आई तो जज साहब को उसे वहां भेजने का आदेष देना पड़ा जहां से नटवर लाल नकली नोट लेकर आया था।


कहचरी से निकलते हुए नटवर लाल ने हंसते हुए जज साहब से कहा कि बचपन से ही सुनते आये है कि घोड़ी चाहे लकड़ी की हो घोड़ी तो घोड़ी ही होती है। इसी तरह डिग्री असली हो या नकली डिग्री तो डिग्री ही होती है। हमारे मंत्री असली तो क्या नकली डिग्री के बिना ही देष की सरकार को बरसों से चला रहे है, उन्हें तो कोई कुछ नही कहता। हर कोई जानता है कि इन लोगो की बातो में सिर्फ दिखावा और प्यार में छलावा होता है। ऐसे लोग जब कभी आसूं भी बहाते है तो वो भी नकली खारे पानी के होते है। आप मुझे अकेले को सजा देकर क्या सुधार कर लोगे। इस दुनियां में असल बचा ही क्या है सब कुछ नकली ही रह गया है। जिस हवाई जहाज से नटवर लाल को भेजने का प्रबंन्ध किया गया उसके उड़ने से पहले ही यह मालूम हुआ कि इस जहाज का पायलट भी नकली है। पुलिस की अपराध षाखा ने बताया कि इस पायलट ने जाली दस्तावेज जमां करवा कर नकली पायलट का लाइसेंस हासिल किया था।

जौली अंकल का तो यही मानना है कि नकली वस्तुओं का व्यापार करने वाले चाहे किसी भी भेस में हो एक सभी एक ही थैली के चट्टे के बट्टे है। आज यदि हमें पूरी कीमत देकर भी हर चीज नकली मिल रही है तो उसका एक ही कारण हेै कि हम लोग खुलकर ऐसे दोशियों के खिलाफ आवाज नही उठाते। नकली वस्त्ुओ का कारोबार करने वालों के मन में मानवता के प्रति कोई दया नही होती इसलिये ऐसे लोगो को मानव कहना ही गलत है। हर नकली चीज को असली बना कर अमीर बनने वालो को यह नही भूलना चाहिये कि अमीर वो नही जिसके पास बहुत धन है या जिसने बहुत धन जमा किया हो। असली अमीर तो वो है जिसे और अधिक धन की जरूरत नही रहती। जिसे हर समय धन की भूख रहती हो वो तो सदा निर्धन ही कहलाता है। छल, कपट, बेईमानी और धोखा देकर चाहे कोई लाख कोषिष कर ले लेकिन असली सदा असली और नकली हमेषा नकली ही होता है।

’’ जौली अंकल ’’

Saturday, July 2, 2011

सहनशीलता - जोली अंकल का नया लेख

’’ सहनषीलता ’’

जैसे ही बंसन्ती के बेटे ने घर आकर अपनी मां को बताया कि मिश्रा जी के बेटे ने उसको गालियां निकाली है वो झट से षिकायत करने उनके घर पहुंच गई। मिश्रा जी ने बंसन्ती से पूछा कि थोड़ा षांति से बताओ कि मेरे बेटे ने ऐसी कौन सी गाली दे दी जो तुम इतना भड़क रही हो? बंसन्ती ने कहा कि वो तो मैं आपको नही बता सकती। मिश्रा जी ने फिर से पूछा कि क्या बहुत गंदी-गंदी गालियां दी है तुम्हारे बेटे को? बंसन्ती ने तपाक् से कहा कि मिश्रा जी आप दिमाग तो ठीक है, क्या आप इतना भी नही जानते कि गालियां हमेषा गंदी ही होती है। आपने क्या कभी अच्छी गालियां भी सुनी है? बंसन्ती और उसका बेटा जिस तरह से मिश्रा जी को उल्टे सीधे जवाब दे रहे थे उनके दिलों-दिमाग का सतंुलन भी बिगड़ने लगा था।

सारी उम्र सहनषीलता का पाठ पढ़ने और पढ़ाने वाले मिश्रा जी को कुछ समझ नही आ रहा था कि इस औरत को कैसे समझाया जाये कि जब तक सभी तथ्यों को अच्छे से न जान लिया जाये उस समय तक किसी से झगड़ा करना तो दूर उन पर कभी भरोसा भी नही करना चाहिए। इतनी छोटी सी बात पर बंसन्ती ने इतना झगड़ा कर दिया कि मिश्रा जी का दिल कर रहा था कि इन लोगो को धक्के मार कर अपने घर से निकाल दे। लेकिन फिर यह सोच कर सहम गये कि यदि मैने भी इन्हें कुछ उल्टा सीधा कह दिया तो बंसन्ती का पति आ जायेगा। वो तो मेरे से सेहत में बहुत तगड़ा है और उसके आने से परेषानी और भी बढ़ जायेगी। इसी के साथ मिश्रा जी मन ही मन यह सोचने लगे कि हर आदमी की सोच उसकी बुद्वि अनुसार अलग-अलग होती है। वैसे भी बच्चोे की इस आधी अधूरी बात को सुन कर आपे से बाहर होने को मैं तो क्या कोई भी व्यक्ति इसे समझदारी नही मानेगा। ऐसे महौल में किसी तरह से खुद को षांत रखते हुए हमें अपनी सहनषक्ति की परीक्षा लेनी चाहिए। इस विचार के मन में आते ही मिश्रा जी ने बात को बदलते हुए बंसन्ती से कहा कि आप दुनियां की दूसरी सबसे खूबसूरत औरत हो? बंसन्ती तिलमिलाते हुए बोली वो तो ठीक है मुझे पहले यह बताओ कि दुनियां की पहली खूबसूरत औरत कौन है? मिश्रा जी ने हंसते हुए कहा कि पहली खूबसूरत औरत भी तुम ही हो लेकिन वो सिर्फ उस समय जब तुम हंसती और मुस्कराहती हो।

मिश्रा जी ने बंसन्ती को थोड़ा और समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि इर इंसान को हमेषा यह मान कर चलना चलिए कि आप सारी दुनियां को अपनी मर्जी मुताबिक नही चला सकते और न ही आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती हैं। जिस प्रकार हम यह सोचते है कि हर कोई हमारे कुछ भी बोले बिना सभी कार्य हमारी इच्छानुसार कर दे। इसी तरह हमें यह भी यह सोचना चाहिए कि हम भी वोहि सभी काम करे जो दूसरे लोग बिना बोले हम से चाहते है। जिस तरह पानी हर जगह अपना स्तर ढूंढ लेता है, हमें भी सहनषीलता अपनाते हुए खुद को भी अपने स्तर व गरिमा के अनुसार दूसरों से मधुर संबंध बनाए रखने चाहिए। सहनषीलता का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि नदियां जब तक षांत भाव से अपने किनारों के बीच बहती रहती है तो दुनियां उनकी पूजा करती है। परंतु जब कोई नदी अपने किनारों को तोड़ कर बाढ़ का रूप धारण कर लेती है तो वही नदियां हत्यारी बन जाती है।

सहनषीलता की खूबियों को यदि गौर से देखे तो यही समझ आता है कि सहनषीलता से जहां हमें जीवन में हर चीज बड़ी सुगमता से मिल जाती है वहीं यह हमारे व्यक्तित्व को निखारती है। दूसरों से हर समय अपेक्षा रखने की बजाए खुद अपने आप से अधिक उम्मीद करनी चाहिए क्योंकि दूसरों से जब हमारी उम्मीद पूरी नही होती तो हमारे मन को बहुत दुख होता है। जबकि खुद से उम्मीद करने पर हमें सहनषीलता की प्रेरणा मिलती है। सहनषीलता ही एक मात्र ऐसा अस्त्र है जिससे आप ताकतवर इंसान को भी षिकस्त देने में कामयाब हो सकते है।

मिश्रा जी की बात खत्म होने के साथ ही बंसन्ती ने कहा कि आज तक हर कोई यह तो जरूर समझाता था कि यदि षांति को पाना है तो धैर्य का समझो, धीरज को समझो। परंतु इतने सब्र से किसी ने भी सहनषीलता को समझाने की हिम्मत नही दिखाई। षायद इसीलिये जिस चीज को समझने की चाह बरसों से मन में थी उसे भी ठीक से न तो कोई समझा पाया न ही मैं समझ पाई। जो बात कई किताबी कीड़े भी ठीक से नही कह पाते आपने तो वो भी सादगी से कहते हुए मेरे मन से षंका के सारे कांटे निकाल दिये। अब जो कुछ मेरी तरफ से कहा-सुनी हुई हो उसके लिये नम्रतापूर्वक आप से क्षमा मांगती हॅू। मिश्रा जी ने बंसन्ती को इस बात का तर्क देते हुए कहा कि सिर्फ कोरी बाते करने से कुछ नही होता, किसी को कुछ भी समझाने से पहले उसे जीवन में अपनाना पड़ता है तभी तो आप किसी दूसरे की दिषा को बदल सकते हैे।

मिश्रा जी द्वारा सहनषीलता के गुणो के ब्खान से प्रभावित होकर जौली अंकल को यह स्वीकार करने में कोई संदेह नही है कि जैसे चमक के बिना हीरे मोतियों की कोई कद्र नही होती, ठीक इसी प्रकार सदाचार और सहनषीलता के बिना मनुश्य किसी काम का नही होता। सहनषीलता ही हमारे मन को षीतलता देने के साथ संतुश्टता एवं खुषी देती है। सहनषीलता के इन्हीं गुणों से ही हमारा स्वभाव सरल बनने के साथ दूसरों को स्वतः हमारी और आकर्शित करते है। अंत में तो इतना ही कहा जा सकता है कि जैसे क्रिकेट व्लर्ड कप जीतने से घर-घर में जुनून व ऊर्जा पैदा हुई है यदि ऐसे ही सहनषीलता जैसे बहुमूल्य और दुर्लभ गुण को हर देषवासी अपना ले तो हमारे घर संसार से लेकर सारा देष सुंदर और खूबसूरत बन जायेगा।

’’जौली अंकल’’