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Thursday, October 27, 2011

चूं-चूं का मुरब्बा

चूं-चूं का मुरब्बा

बंसन्ती के घर उसकी षादी की तैयारियां जोर-षोर से चल रही थी। सभी लोग दौड़-भाग कर रहे थे कि बारात के आने से पहले सारे काम ठीक से निपट जायें। इतने में बसन्ती की सबसे करीबी सहेली उसके घर आर्इ और बंसन्ती से बोली कि अब तुम षादी करके ससुराल जा रही हो। लेकिन एक बात याद रखना कि औरत घर की लक्ष्मी होती है, षादी के बाद तुम भी अपने इस लक्ष्मी वाले रूतबे को कायम ही रहना। बंसन्ती ने उससे पूछ लिया कि यदि औरत लक्ष्मी होती है तो फिर पति क्या होता है? सहेली ने जवाब देते हुए कहा कि मेरा माथा तो पहले ही ठनक गया था कि तुम दिखने में जितनी होषियार लगती हो, असल में उतनी है नही। बलिक तुम तो बिल्कुल मिêी की माधो ही हो, जो इतना भी नही जानती कि पति लक्ष्मी का वाहन होता है। बंसन्ती ने कहा कि मैं कुछ समझी नही। उसकी सहेली ने कहा कि तू भी कमाल करती है, सारी दुनियां जानती है कि लक्ष्मी का वाहन उल्लू होता है और यह बात अच्छे से पल्ले बांध कर ससुराल जाना कि पति उल्लू से बढ़ कर कुछ नही होता।

यह पति नाम के प्राणी षादी से पहले तो लड़कियों के पीछे गलियों में मारे-मारे फिरते है परंतु षादी होते ही गिरगिट की तरह रंग बदल लेते है। जब तक अपने पतियों को ठीक से काबू में न रखा जाये तो यह हर दिन कोर्इ न कोर्इ नया गुल खिलाने को तैयार रहते है। खुद तो सारा दिन दोस्तो के साथ गुलछर्रे उड़ाते रहेगे और घर आते ही बिना किसी बात पर सारा गुस्सा बीवियों पर निकालने लगते हैं। बंसन्ती ने कहा कि इस मामले में तो तुम बहुत नसीब वाली हो। तुम्हारे पति को जब भी देख लो उनका मुंह तो हर समय लटका रहता है। दूर से देखने में तो बिल्कुल ऐसे लगते है जैसे कि उनके मुंह में जुबान है ही नही। सहेली ने कहा मेरी बात छोड़ मेरे पति तो बहुत ही कायर किस्म के है। बंसन्ती ने कहा कि मुझे तो वो बेचारे कायर कम और सहमे से चूहे की तरह अधिक दिखार्इ देते है। बंसन्ती की सहेली ने कहा कि मेरे सामने चूहे का नाम मत ले। अगर मेरे पति चूहे कि तरह होते तो मै तो उनसे डर कर थर-थर कांप रही होती क्योंकि चुहों को देखते ही मैं बहुत भयभीत हो जाती हू। अब मेरी बात छोड़ और ससुराल में पहले दिन ही पति का मुरब्बा बनाने के लिये तैयारी करनी सीख ले। यदि तूने षुरू में थोड़ी ढ़ील दे दी तो फिर तेरा वोहि हाल होगा कि जैसे मुर्गी बेचारी की जान चली जाती है और खाने वाले कह देते हे कि आज खाने में स्वाद नही आया।

बंसन्ती ने कहा कि मैने 36 प्रकार के अचार मुरब्बों के बारे में सुना है। मैं यह भी जानती हू कि यह सारे बहुत गुणकारी होते है, लेकिन पति के मुरब्बे के बारे में तो आज तक किसी ने कुछ नही बताया कि ऐसा भी कोर्इ मुरब्बा होता है? बंसन्ती की सहेली ने उसे धीरे से बताते हुए कहा कि जिस तरह इंसान सदियों से हर तरह के मुरब्बों का उपयोग करता आ रहा है, ठीक उसी तरह समझदार औरते पति को चूं-चू का मुरब्बा बना कर रखती है। मेरा तो बस नही चलता वरना मैं तो पतियों के इस चंू-चूं वाले मुरब्बे की विधि का विस्तार और प्रचार विष्वस्तर पर करके सभी औरतो का जीवन सुखी बना दूं। इतना कहते-कहते जैसे ही बंसन्ती की सहेली की नजर पीछे खड़ी बंसन्ती की मां की और गर्इ तो वो उन्हें देख कर थोड़ा सा झेंप गर्इ।

बंसन्ती की मां ने उसकी सहेली के कधें पर हाथ रखते हुए कहा कि बेटी मैने तुम्हारी सारी बाते सुन ली है। मैं यह भी मानती हू कि मैं तुम्हारी तरह अधिक पढ़ी-लिखी तो है नही और न ही आज के जमानें के दस्तूर को जानती हू। परंतु दुनियां के हर प्रकार के उतार-चढ़ाव जीवन में अच्छे से देख चुकी हू। घर के बजर्ुगो द्वारा दी हुर्इ षिक्षा और ज्ञान से तो इतना ही सीखा है कि गृहस्थ की गाड़ी को चलाने के लिए अपने-अपने हिस्से के कर्म समय पर करना ही हर पति-पत्नी का कत्र्तव्य होना चाहिये। पति-पत्नी अपने सच्चे प्यार के साहरे ही हर प्रकार की परिसिथतियों को झेलते हुए जीवन को हंसते-हंसते बिता सकते है। बेटी इतना तो तुमने भी जरूर पढ़ा होगा कि केवल अपनी प्रषंसा का ब्खान करने वालों को कभी भी यष नही मिलता, वे केवल उपहास का पात्र बनते है। जबकि पति-पत्नी का सच्चा प्रेम न तो कभी किसी को कश्ट देता है और न ही यह कभी नश्ट होता है। जब दोनो प्राणी एक दूसरे को खुषी देते है और सामने वाला खुषी से खुषी को स्वीकार कर लेता है तो दोनो ही महान बन जाते है। जिस व्यकित के कर्म अच्छे होते है वो दूसरे इंसान को तो क्या अपनी किस्मत को भी अपनी दासी बना सकता है। इतना सब कुछ सुनते ही बंसन्ती की सहेली फबक कर रो पड़ी। बंसन्ती की मां के गले लगते हुए उसने कहा कि मैं तो आजतक यही समझती रही कि पति को सदा अगूठें के नीचे दबा कर रखने से ही औरत सुखी रह सकती है।

वैसे तो मुरब्बो के सेवन और बजर्ुगो की बात का असर कुछ समय के बाद ही दिखार्इ देता है, परंतु इन सभी लोगो की रस भरी बातचीत सुनने के बाद यह तो एकदम साफ हो गया है कि आचरण रहित विचार चाहे कितने भी अच्छे क्यूं न हो वो खोटे सिक्के की तरह ही होते है। वैवाहिक जीवन में सुख और दुख की बात की जाएं तो किसी भी सदस्य को कश्ट देना दुख से कम नही और दूसरों को खुषी देना ही सबसे बड़ा सुख और पुण्य होता है। मुरब्बों के बारे में इतनी मीठी बाते करने के बाद जौली अंकल के मन में ठंडक के साथ दिमाग भी चुस्त होते हुए यह सोचने लगा है दूसरों के साथ सदा वही व्यवहार करो जो आप दूसरों से चाहते हो। इसके बाद फालतू की बातो को सोच कर आपको कभी भी अपनी हुकूमत की षकित दिखाने के लिये चूं-चूं का मुरब्बा बनाने की जरूरत नही पड़ेगी।
जौली अंकल

हँसी के जलवे - जोली अंकल

हंसी के जलवे

वीरू ने अपने दोस्त जय से गप-षप करते हुए कहा कि जब मेरी नर्इ-नर्इ षादी हुर्इ थी तो मुझे मेरी बीवी बंसन्ती इतनी प्यारी लगती थी कि मन करता था कि इसे कच्चा ही खा जाऊ। जय ने पूछा कि अब यह सब कुछ तुम मुझे खुषी से बता रहे हो या दुखी होकर। वीरू ने कहा कि अब सुबह-षाम इसकी फरमार्इषें पूरी करते-करते परेषान हो गया हू। कल जब बंसन्ती ने मेरे आगे एक और नर्इ मांग रखी तो मैने उससे कहा कि मैं अब तुम्हारी और कोर्इ्र भी मांग पूरी नही कर सकता, मैं तो जा रहा हू खुदकषी करने। जानते हो इस बेवकूफ औरत ने क्या कहा, कहने लगी खुदकषी करने से पहले एक अच्छी सी सफेद साड़ी तो ला दो। मेरे पास तुम्हारी कि्रया की रस्म पर पहनने के लिए कोर्इ अच्छी साड़ी नही है। इसकी ऐसी बेवकूफियों को देख कर तो यही सोचता हू कि अगर उस समय मैं इसे खा ही जाता तो अच्छा होता। जय ने कहा कि कल तक तो तू बंसन्ती के जलवों का दीवाना था। तेरे दिलोदिमाग पर हर समय बंसन्ती का जादू ही सिर चढ़ कर बोलता था। कभी कही भी जाना होता था तो तू सारे काम छोड़ कर इसके सौंदर्य की और खिंचा चला जाता था। वो एक चीज मांगती थी तो तू चार लेकर आता था। अब वही बंसन्ती तुम्हें एक आंख भी नही भा रही ऐसा क्या हो गया?

वीरू ने अपना दुखड़ा रोते हुए जय से कहा कि तुम जिस औरत के जलवों के बारे में तारीफ कर रहे हो, वो औरत नही जहर की पुडि़या है। मेरे तो कर्म फूटे थे जो मैं इसको जी का जंजाल बना कर अपने घर ले आया। सारा दिन उल्टी-सीधी बाते करने और ऊलजलूल बकने के सिवाए इसे कुछ आता ही नही। यह तो मैं हू कि खून के घूंट पीकर किसी तरह से इसके साथ अभी तक निभा रहा हू। मेरा तो इस औरत से ही मन खêा हो गया है। जय ने वीरू को रोकते हुए कहा कि अब यह अपनी बंदर घुड़किया देनी बंद करो, तुमने अपनी बेसिर पैर की बातो को अच्छे से नमक मिर्च लगा कर बहुत कुछ कह दिया है। क्या तुम मुझे एक बात बताओगे कि तुमने कभी भी अपनी पत्नी को प्यार से रास्ते पर लाने को प्रयास किया है। क्या सारी गलतियां उसी की है तुम्हारी कोइ्र्र गलती नही। मुझे तो तुम्हारी अक्कल पर हैरानगी हो रही है कि वो क्या घास चरने गर्इ हुइ्र्र है जो सारा दोश अपनी बीवी के माथे मढ़ कर खुद ही अपने मुंह मिया मिट्टू बनते जा रहे हो।

जय ने वीरू को आगे समझाते हुए कहा कि घरवालों की बात को यदि छोड़ भी दे तो हमारी अपनी आखें, कान, नाक, जीभ आदि सब कुछ अपनी मर्जी मुताबिक समय-समय पर कुछ न कुछ मांग करते रहते है। जब जिंदगी में कुछ चीजे कम होने लगती है या खत्म हो जाती है तो हमें बहुत तकलीफ होती है। अब इससे पहले कि तुम पूछो कि ऐसी कौन सी चीजे है जिन के कारण इंसान का जीवन कश्टदायक बन जाता है, मैं ही तुम्हें बता देता हू कि इसमें से कुछ खास है प्यार, रिष्ता, बचपन, दोस्ती, पैसा और सबसे जरूरी चीज है हंसी। वीरू ने जय को टोकते हुए कहा कि बाकी सभी चीजे तो समझ आ रही है, लेकिन हंसी के बिना हमारे जीवन पर क्या असर पड़ सकता है, यह बात कुछ मेरे पल्ले नही पड़ी। जय ने सामने रखी हुर्इ वीरू और बसन्ती की एक तस्वीर को देखते हुए कहा कि जब तुमने यह फोटो खिचवार्इ थी तो तुम षायद एक-दो सैंकड के लिए मुस्कराऐ होगे, परंतु उस एक-दो सैंकड की मुस्कराहट ने तुम्हारी यह तस्वीर सदा के लिए खूबसूरत बना दी। अब यदि आप लोग हर दिन कुछ पल हंसने की आदत बना लो तो फिर सोचो कि तुम्हारी सारी जिंदगी कितनी षानदार बन सकती है। मेरे यार घर परिवार में रूठने मनाने के साथ जो लोग थोड़ा मुस्कराहना सीख लेते है उन्हें जीवन में संतुलन बनाये रखने में कोर्इ दिक्कत नही आती। हंसी के जलवों की बात करे तो इस में वो षकित है कि यह हर प्रकार के तनाव को तो खत्म करती ही है साथ ही आपको कोर्ट-कहचरियों और पुलिस के चंगुल से बचा सकती है। वीरू तुम्हारी सम्सयां यह हेै कि तुम खुद तो हर समय खुष रहना चाहते हो, लेकिन दूसरों की कठिनार्इयों से तुम्हें कोर्इ लेना देना नही है। इसमें तुम्हारी भी गलती नही है क्योंकि आजकल किसी के पास भी दूसरों को खुषी देना तो दूर खुद को भी खुष रहने के लिए समय ही नही है। मेरे यार एक बात कभी मत भूलना कि जितनी मेहनत से लोग अपने लिये परेषनियां खड़ी करते है उससे आधी से हंसी के जलवों की बदौलत अपने घर को स्वर्ग बना सकते हंै।

हंसी के जलवों की इतनी सराहना सुनने के बाद जौली अंकल का भी रोम-रोम हर्श से छलकने लगा है। उनके अंग-अंग से यही आवाज आ रही हे कि जीवन का भरपूर आनन्द पाने के लिये जब भी हंसने का मौका मिले खिलखिलाकर हसों। आप भी यदि अपने जीवन को सुखों का सागर बनाना चाहते है तो इसका सबसे सरल उपाय है कि आप अपने मन में सकारात्मक राय रखते हुए हंसी के जलवे बिखेरते रहोे।

जौली अंकल