Search This Blog

Followers

Wednesday, May 11, 2011

इंतज़ार - जोली अंकल का एक और रोचक लेख

’’ इंतज़ार ’’

मसुद्दी लाल जी के बेटे की षादी जैसे ही तह हुई तो वो किसी रिष्तेदार को न्योता देने की बजाए सबसे पहले अपने खानदानी दर्जी के पास जा पहुंचे। उन्होने दर्जी से कहा कि यदि तुम्हें ठीक से याद हो तो मेरे पिता जी ने मेरी षादी के समय एक बढ़िया सी षेरवानी तैयार करने को कहा था, लेकिन तुमने आज तक वो षादी का जोड़ा तैयार नही किया। अब अगले महीने मेरे बेटे की षादी तह हुई है। मैं चाहता हॅू कि दुल्हा बनते समय वो वही जोड़ा पहने, जो मेरे पिता जी मेरी षादी के समय मुझे पहना हुआ देखना चाहते थे। दर्जी ने आखे टेढ़ी करते और चश्मा नाक पर चढ़ाते हुए कहा, मियां मैने आपकी षादी के समय भी कहा था, कि यदि हमसे अच्छा और बढ़िया काम करवाना है तो आपको थोड़ा इंतज़ार तो करना ही पड़ेगा। इस तरह से जल्दी के काम न तो हम ने कभी किये है और न ही हम कर सकते है। मसुद्दी लाल जी ने भी थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा कि मेैं भी अब और इंतज़ार नही कर सकता, आप इसी वक्त मेरा कपड़ा वापिस लोटा दो, मैं अपने बेटे की षादी के लिये षैरवानी कहंी और से सिलवा लूंगा।

जैसे ही मसुद्दी लाल जी षेरवानी सिलवाने के लिये कपड़ा लेकर दूसरे दर्जी के पास पहुंचे तो वो जल्दी में कहीं जा रहा था। उसने जाते-जाते इतना ही कहा कि आप 15-20 मिनट इंतज़ार करो, मैं अभी आता हॅू। मसुद्दी लाल जी ने यदि तुम 15-20 मिनट में नही आये तो। उस दर्जी ने मुस्कराहते हुए कह दिया, फिर आप थोड़ा और इंतज़ार कर लेना। कारण चाहे कुछ भी हो हमारे देश में जन्म से लेकर दुनियां को बाय-बाय करने तक हम अपना आधे से अधिक समय तो इंतज़ार करते हुए व्यर्थ में ही गवां देते है। घर से दफतर जाना हो या बाजार, राशन की लाईन हो या सिनेमा टिकट की खिड़की, बैंक में पैसे या बिजली-पानी का बिल जमां करवाना हो, हर जगह लाईन में खड़े रहते हुए हमें अपनी बारी के लिए घंटो इंतज़ार करना पड़ता है। खास तौर से आम आदमी को अपने जीवन स्तर में सुधार के लिये नेताओं द्वारा किये हुए कभी न पूरे होने वाले वादों को अमली जामा पहनाने का इंतज़ार रह-रह कर सताता है।

इंतज़ार का तो यह आलम हो गया है कि बड़े षहरों में अब एक जगह से दूसरी जगह की दूरी मील या किलोमीटर में न बता कर समय के हिसाब से बताने का चलन चल निकला है, क्योंकि कुछ किलोमीटर का फांसला तह करने में भी घंटो टैªफिक जाम के इंतज़ार में निकल जाते है। टिकट रेल गाड़ी की हो या हवाई यात्रा की उसे पाने के लिये कई-कई महीनों का इंतज़ार करना तो एक आम बात हो चुकी है। कहने को आऐ दिन तेजी से बढ़ती मंहगाई की मार से हर कोई परेषान है, लेकिन किसी भी अच्छे होटल में न तो रहने के लिये कमरा मिलता है और न ही अच्छा खाना खाने के लिये जगह। हर तरफ से एक ही जवाब सुनने को मिलता आप थोड़ा इंतज़ार करो अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो षायद कुछ देर में कोई जुगाड़ बन जाये।

घर में षादी-विवाह या किसी अन्य उत्सव का आयोजन करना हो, अपनी जेब से पैसा खर्च करने के बावजूद भी हमें हर जरूरी काम करवाने के लिये छोटे-बड़े सभी संबंधित लोगो का इंतज़ार करना पड़ता है। एक जनसाधारण को सबसे अधिक इंतज़ार हमारे सरकारी बाबू करवाते है। कई बार तो ऐसा भ्रम होने लगता है कि हमारे यहां लोग सरकारी नौकरी केवल दो चीजो के लिये ही करते है, पहली तनख्वाह और दूसरी छुट्टीयां लेने के लिये। उनकी इस लापरवाही से जनता को इंतजार करते हुए कितनी परेषानी होती है इस दर्द से उन्हें कोई फर्क नही पड़ता। दूसरों को इंतज़ार करवाते-करवाते इन लोगो को खुद भी हर काम में इंतज़ार करने की आदत हो जाती है नतीजतन हर काम में प्रतीक्षा करते-करते उनकी यह आदत उन्हें दूसरो की अपेक्षा बहुत पीछे छोड़ देती है। जबकि परिश्रमी लोग बिना किसी को इंतज़ार करवाएं अपना हर काम समय पर करते है और बिना किसी से कुछ भी कहें समय के साथ तेजी से आगे बढ़ते रहते है।

कुछ लोगो का मानना है कि इंतज़ार का फल मीठा होता है, परन्तु यह भी सच है कि अक्सर इंतज़ार में एक-एक पल बरसो की तरह बीतता है। हर इंतज़ार में सिर्फ दर्द ही छिपा हो ऐसा भी नही है। बूढें़ माता-पिता को परदेस में बसे अपने बच्चो का, बच्चो को अपने दोस्तो का, दोस्तो को अपने प्रियजनों के इंतज़ार में भी एक आषा, एक उम्मीद दिखाई देती है। प्रेमी-प्रेमीका को अपने मधुर मिलन का इंतज़ार मधु की तरह मीठा लगता है, क्योकि वो जानते है कि जुदाई की रात कितनी भी लंबी क्यूं न हो एक दिन तो सुहानी सुबह का इंतज़ार खत्म हो ही जायेगा। एक और जिंदगी में हर किसी को अपनी मंजिल पाने का मीठा सा इंतज़ार रहता है, वही जिंदगी के आखिरी पलों में मृत्यु षैया पर मरती आखों को मोक्ष पाने की आस में आखिरी सांस का इंतज़ार करना पड़ता है।

समझदार लोग तो यही मानते है कि समय सर्वाधिक अमूल्य है अतः हमें इसे एक दूसरे के इंतज़ार में बेकार गवाने की जगह सदैव इसका सदृपयोग करना चहिए। यदि इंतज़ार की इस बुरी लत को खत्म करना है तो उसके लिये केवल दृढ़ निश्ठा, संकल्प और इच्छाषक्ति की जरूरत है, इन सभी के आगे इंतजार का टिक पाना अंसभव है। इंतजार का अच्छे से इंतजार करने के बाद जौली अंकल यही निचोड़ निकाल पाये है कि व्यर्थ के इंतजार में समय गवाने की बजाए यदि सारा ध्यान कर्म पर केद्रित किया जाये तो सफलता खुद ही तुम्हारे ़द्वार चल कर आ जाती है।

No comments: